Almighty kabir saheb
परमेश्वर कबीर साहेब जी
"हाड़ चाम लहू नहीं मेरे, कोई जाने सतनाम उपासी।
तारण तरण अभय पद दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।"
परमेश्वर कबीर साहेब का पांच तत्व से बना शरीर नहीं है,तारण तरण अभय पद दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।"
पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब ने काशी में लहरतारा नामक तालाब के जल में कमल के फूल पर स्वयं प्रगट होकर बालक रूप बनाया था वहाँ से परमेश्वर को नीरू नीमा नामक दंपत्ति उठाकर अपने घर ले आये थे।।उस परमेश्वर की परवरिश कुँवारी गायो से हुई थी।।
वेदों में कविर्देव, गुरु ग्रन्थ साहेब में हक्का कबीर तथा कुरान शरीफ में अल्लाह कबीरन्) नाम से कबीर साहेब के पूर्ण परमात्मा होने की सम्पूर्ण जानकारी है
कबीर परमात्मा की लीलाएं:-
वैश्या का उद्धार:-
परमेश्वर कबीर जी रात्रि में घर-घर में सत्संग करते थे। दिन में अपने निर्वाह के लिए सब श्रोता तथा कबीर जी कार्य करते थे।
एक रात्रि में सत्संग चल रहा था। थोड़ी दूर पर काशी शहर की प्रसिद्ध वैश्या चंपाकली का आलीशान मकान था। उस रात्रि में वैश्या को ग्राहकों का टोटा था। जिस कारण से इंतजार में जाग रही थी। उसको परमात्मा कबीर जी के मुख कमल से प्रिय अमृतवाणी सुनाई दी। सत्संग में बताया गया कि मानव (स्त्राी/पुरूष) का जीवन बड़े पुण्यों से प्राप्त होता है। जो स्त्राी-पुरूष भक्ति नहीं करते, दान-सेवा नहीं करते, वे परमंतम के छोर हैं। (गीता अध्याय 3 श्लोक 12 में भी कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा से प्राप्त धन का कुछ अंश दान-धर्म में लगाए बिना स्वयं ही पेट भरता रहता है, वह तो परमात्मा का चोर है।) जो मानव चोर, डकैती, ठगी ,वैश्यागमन करती हैं, वे महाअपराधी हैं। जो स्त्रिया वैश्या का धंधा करती हैं, वे भी महाअपराधी हैं। परमात्मा के दरबार में उनको कठिन दंड दिया जाएगा। मानव जीवन शुभ कर्म करने तथा भक्ति करने के लिए प्राप्त होता है।
ऐसी बहुत सी लीलाएं की है कबीर परमात्मा ने।
In its own sweet time:-
हमारे लिए ये बहुत ही मूल्यवान समय है क्योंकि ये मौका हम चूक गए तो 84 लाख योनियों में भटकना पड़ेगा और फिर ना जाने अगले मनुष्य जींवन में भगति मिल पाए या नहीं इसलिए अपने शास्त्रो को को खोल कर सच्चे संत द्वारा बताए गए ज्ञान से मिलान करे ओर उसके द्वारा बताई गई भगति विधि से अपना कल्याण करवाये
परमात्मा की वास्तविक लीलाओ के लिए पढिए पुस्तक "ज्ञान-गंगा" या "जीने की राह"।
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ReplyDelete4 june kabir parmeshwar prakat Diwas
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